Sunday, November 27th, 2022

वर्ल्ड डेयरी समिट-2022 का PM मोदी ने किया उद्घाटन:बोले- कई राज्यों में लंपी बीमारी से नुकसान हुआ, 2025 तक हर पशु का वैक्सीनेशन होगा

PM नरेंद्र मोदी ने ग्रेटर नोएडा में सोमवार को वर्ल्ड डेयरी समिट-2022 का उद्घाटन किया। PM मोदी ने कहा, ” पिछले कुछ समय में भारत के अनेक राज्यों में लंपी नामक की बीमारी से पशुओं का नुकसान हुआ। राज्य सरकारों के साथ मिलकर केंद्र सरकार इसे कंट्रोल करने की कोशिश कर रही है। हमारे वैज्ञानिकों ने लंपी रोग की स्वदेशी वैक्सीन भी तैयार कर ली है। भारत में हम पशुओं के यूनिवर्सल वैक्सीनेशन पर भी बल दे रहे हैं।”

उन्होंने कहा, “हमने संकल्प लिया है कि 2025 तक हम शत प्रतिशत पशुओं को फुट एंड माउथ डिजीज और ब्रुसेलोसिस की वैक्सीन लगाएंगे। हम इस दशक के अंत तक इन बीमारियों से पूरी तरह से मुक्ति का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं।” समिट में 50 देशों के डेलिगेट्स, 800 किसानों समेत करीब 1500 प्रतिनिधि शामिल हुए।

दूध उत्पादन 210 मिलियन टन पहुंचा

इंटरनेशनल डेयरी फेडरेशन के चेयरमैन पियर क्रिस्टियानो ने हिंदी में बोलकर PM और CM का स्वागत किया। केंद्रीय पशुपालन मंत्री पुरुषोत्तम रूपाला ने PM नरेंद्र मोदी को स्वागत में सरदार वल्लभ भाई पटेल को मूर्ति दी। केंद्रीय पशुपालन मंत्री ने कहा, “1974 में जब पहली बार भारत में यह समिट हुआ था, तब देश का दूध उत्पादन 23 मिलियन टन था। आज 2022 में यह उत्पादन 210 मिलियन टन यानी 10 गुना दूध की वृद्धि हुई है।”

विदेशियों को गुजरात की बन्नी भैंस की खासियत बताई

PM मोदी ने कहा, “हमारे पास भैंस और गायों की जो नस्ल है, वह कठिन समय में भी खुद को ढालती हैं। गुजरात की बन्नी भैंस रात के कम तापमान में घास चरने के लिए निकलती है। क्योंकि गुजरात में दिन में भयंकर धूप होती है। विदेश से आए मेहमान यह सुनकर चौंक जाएंगे कि रात में भैंस के साथ उनका पशुपालक नहीं होता है। ये बन्नी भैंस 15 किमी. दूर चरते हुए निकल जाती हैं। सुबह होते ही वह घर पहुंच जाती हैं। हमने सिर्फ बन्नी का उदाहरण दिया है। ये भैंसें अपने ही घर लौटती हैं, दूसरे के घर नहीं जाती हैं। आज तक यह नहीं सुनने को मिला है कि किसी की बन्नी भैंस खो गई है।”

8 साल में 44% दूध उत्पादन की वृद्धि हुई

PM ने कहा, “2014 के बाद से हमारी सरकार ने भारत के डेयरी सेक्टर के कैपेसिटी को बढ़ाने के लिए काम किया। आज इसका नतीजा है कि दूध उत्पादन से लेकर किसानों की आय में बढ़ी है। 2014 में भारत में 146 मिलियन टन दूध का उत्पादन होता था। 2022 में ये बढ़कर 210 मिलियन टन पहुंच गया। इन 8 सालों में करीब 44% की वृद्धि हुई है।

देशभर की दूध कंपनियों ने लगाई प्रदर्शनी

6900 वर्गमीटर में एग्जीबिशन लगाई गई है। इस एग्जीबिगशन में अमूल, मदर डेयरी, नंदिनी जैसी प्रमुख दूध उत्पादक कंपनियों ने अपने-अपने स्टॉल लगाए हैं। इन स्टॉल्स के जरिए कंपनियां बता रही हैं कि भारत में वे श्वेत क्रांति कैसे लेकर आईं। प्रधानमंत्री आज इस प्रदर्शनी का भी भ्रमण करेंगे। वर्ल्ड डेयरी समिट को कुल 41 दूध कंपनियां स्पांसर कर रही हैं।

देशभर की तमाम दूध कंपनियों ने इस समिट में प्रदर्शनी लगाई है।

देशभर की तमाम दूध कंपनियों ने इस समिट में प्रदर्शनी लगाई है

समिट से जीरो कार्बन उत्सर्जन होगा

समिट की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ये कार्बन न्यूट्रल होगी। मतलब, यहां किसी भी तरह का प्रदूषण नहीं होगा। पूरे कार्यक्रम स्थल की पावर सप्लाई साढ़े तीन मेगावाट सोलर एनर्जी से होगी। कॉफी, चाय, पानी समेत किसी भी खान-पान की चीज में प्लास्टिक का इस्तेमाल नहीं होगा। अतिथियों और डेलिगेट्स को कार्यक्रम स्थल तक लाने के लिए इलेक्ट्रिक व्हीकल लगाए गए हैं। समिट को कार्बन न्यूट्रल इसलिए भी बनाया गया है, ताकि जलवायु परिवर्तन के बारे में डेलिगेट्स को बताया जा सके।

छोटे-छोटे पशुपालक किसानों और महिलाओं ने देश को दूध उत्पादन में नंबर बनाया है। होर्डिंग्स पर यह दिखाया गया है।

छोटे-छोटे पशुपालक किसानों और महिलाओं ने देश को दूध उत्पादन में नंबर बनाया है। होर्डिंग्स पर यह दिखाया गया है।

मिठाई मैप ऑफ इंडिया

दूध से सैकड़ों तरह की मिठाइयां बनती हैं। इसमें 61 वे मिठाइयां हैं, जो देश के विभिन्न राज्यों में सबसे फेमस हैं। वर्ल्ड डेयरी समिट में इन 61 मिठाइयों को ‘मिठाई मैप ऑफ इंडिया’ नामक होर्डिंग्स पर प्रदर्शित किया गया है। उत्तर प्रदेश की प्रमुख मिठाई के रूप में घेवर और गाजर के हलवे को इसमें शामिल किया गया है।

कर्नाटक का डोलू कुनिथा सुनिए और देखिए

वर्ल्ड डेयरी समिट में दुनियाभर से आने वाले लोगों को भारतीय संस्कृति की झलक भी दिखाई जाएगी। इसके लिए विभिन्न राज्यों से कलाकार सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए बुलाए गए हैं। कर्नाटक का लोक नृत्य डोलू कुनिथा है। इसलिए डोलू कुनिथा के सर्वश्रेष्ठ कलाकार यहां पर बुलाए हैं। इसी तरह अन्य राज्यों से भी कलाकार आए हैं।

पशुपालकों पर लघु फिल्म

इस समिट में एक लघु फिल्म भी दिखाई जाएगी। इसमें बताया जाएगा कि किस तरह से भारत देश छोटे-छोटे पशुपालकों, खासकर महिलाओं के बूते दुनिया के दूध उत्पादन में नंबर वन पहुंचा है। पशुपालकों में आधे से ज्यादा महिला किसान हैं। पिछले आठ साल में देश में दूध उत्पादन में 44% से ज्यादा वृद्धि हुई है।

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