Sunday, November 27th, 2022

‘प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट’(पूजा स्थल अधिनियम-1991 ) केस की सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट(SupremeCourt), 5 पेज में तैयार करें जवाब

पूजा स्थल अधिनियम-1991 की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. काशी नरेश की बहन के वकील ने सुनवाई के दौरान कहा कि अदालत मेरे मुवक्किल के आवेदन को स्वीकार करे. इसपर अदालत ने भी सहमति जताई. मुख्य न्यायाधीश ने एसजी तुषार मेहता से पूछा कि क्या केंद्र की ओर से जवाब दाखिल कर दिया गया है. इसके जवाब में एसजी मेहता ने कहा कि जल्द ही दाखिल कर दिया जाएगा. दरअसल, काशी नरेश विभूति नारायण सिंह की बेटी कुमारी कृष्ण प्रिया ने सुप्रीम कोर्ट में आवेदन किया है.

कृष्ण प्रिया ने सुप्रीम कोर्ट को दिए आवेदन में कहा कि काशी रियासत के पूर्व शासक सारे मंदिरों के मुख्य संरक्षक थे. इसलिए तत्कालीन शाही परिवार के सदस्य होने के नाते हमारे पास पूजा स्थल अधिनियम को चुनौती देने का पूरा अधिकार है. क्योंकि ये संविधान के आर्टिकल 25, 26, 29 तथा 32 के उल्लंघन का मामला है. सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्र ने अब तक इस मामले पर जवाब नहीं दिया है. दो हफ्ते जवाब के लिए केंद्र सरकार ने मांगे हैं. वह पहले जवाब दाखिल करें.

सभी आवदनों पर होगा विचार

कोर्ट ने कहा, ‘हम सभी आवेदनों पर विचार करेंगे. इस मामले पर आवेदक अपने लिखित दलील दाखिल करें, जो पांच पन्नों से ज्यादा न हो. हम इस मामले में बाद में दाखिल याचिकाओं पर भी नोटिस जारी कर रहे हैं. हमारा मानना है कि यह मामला तीन जजों की पीठ के सामने सुना जाए. हम रजिस्ट्री को 11 अक्टूबर को इस मामले को उचित पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करने का निर्देश देते हैं.

कुमारी कृष्ण प्रिया ने आवेदन में कहा कि पूजा स्थल कानून प्रभावित पक्षों को मंदिरों को फिर से हासिल करने के लिए अदालत के समक्ष जाने से रोकता है. जबकि सबूतों के जरिए न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ये अवसर प्रभावित पक्षों को मिलना चाहिए. प्रिया ने आगे तर्क दिया कि काशी शाही परिवार के मुखिया को पारंपरिक रूप से काशी विश्वनाथ मंदिर के धार्मिक पहलुओं पर अधिकार के तौर पर मान्यता मिली हुई है.

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