Sunday, November 27th, 2022

गायों को केले के पेड़ में बांध बांग्लादेश भेज रहे:गर्दन तने में फंसी रहती है, चारों पैर बंधे रहते हैं, ईद पर कीमत डेढ़ लाख रुपए:-

केले के पेड़ का मोटा हिस्सा। उसके बीच गाय का सिर। पैर रस्सी से कसकर बंधे हुए। ऊपर से सिर्फ गाय का सिर नजर आता है। बाकी हिस्सा पानी में। इसी तरह तैरते-तैरते कुछ ही मिनटों में गायें नदी पार कर जाती हैं। वहां पहले से मौजूद लोग उन्हें निकालते हैं। रस्सी खोलते हैं और बांग्लादेश ले जाते हैं।

गाय-बछड़ों को इसी तरह पश्चिम बंगाल से बांग्लादेश भेजा जा रहा है। हर चीज के लिए कोडनेम तय हैं। तस्कर गाय के बछड़े को पेप्सी बुलाते हैं। तस्करी का मास्टरमाइंड अनुब्रत मंडल को बताया जाता है।

बीरभूम के अनुब्रत TMC के नेता और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खास हैं। CBI ने 11 अगस्त को अनुब्रत मंडल को अरेस्ट किया था।

तस्करी का कारोबार समझने के लिए हम भारत-बांग्लादेश बॉर्डर पहुंचे। यहां पता चला कि भारत में 30 हजार में खरीदी गई गाय बांग्लादेश में डेढ़ लाख तक में बिकती है।

बॉर्डर का ज्यादातर हिस्सा खुला, एक पॉइंट पर सिर्फ दो जवान:-

जालंगी गांव पद्मा नदी के किनारे बसा है। पद्मा बांग्लादेश की बड़ी नदियों में से एक है। बांग्लादेश के कुष्ठिया, पबना और राजशाही जिले इससे लगते हैं। भारत में यह मुर्शिदाबाद में बहती है। कई साल से इसी नदी से कैटल स्मगलिंग हो रही है। नदी कहीं संकरी, तो कहीं चौड़ी है। कहीं बहाव तेज, कहीं कम

बारिश के बाद कुछ जगहों पर यह सूख भी जाती है। नदी क्रॉस कर कुछ कदम चलने पर बांग्लादेश लग जाता है। नदी के किनारे बॉर्डर का ज्यादातर हिस्सा ओपन है। कुछ ही हिस्से पर फेंसिंग लगी है।

बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स यानी BSF यहां तैनात है, पर एक ऑब्जर्वेशन पॉइंट पर दो ही जवान होते हैं। इन्हें आधा से एक किमी तक का एरिया संभालना होता है। ऐसे में तस्करी रोकना इनके लिए लगभग नामुमकिन सा है।

नदी में बहाव तेज हो, तो तस्कर ज्यादा एक्टिव रहते हैं:-


गायों को नदी पार कराने के लिए तस्कर केले के तने का इस्तेमाल करते हैं। गाय को तने में बांधकर पानी में फेंक दिया जाता है। नदी के उस पार पहले से मौजूद लोग इन्हें निकालकर बांग्लादेश ले जाते हैं।

पद्मा  नदी है जो बांग्लादेश में गंगा की मुख्य धारा है। अर्थात् गंगा नदी बांग्लादेश में प्रवेश करते ही ‘पद्मा’ के नाम से जानी जाती है।

राजशाही, पश्चिमी बांग्लादेश में एक प्रमुख शहर, पद्मा के उत्तर तट पर स्

अफसर ने बताया कि जानवरों की तस्करी रात में होती है। वक्त और जगह बदलती रहती है। कई बार दिन में भी तस्करी की कोशिश होती है। जब नदी में तेज बहाव होता है, तब तस्कर ज्यादा एक्टिव रहते हैं, क्योंकि उस वक्त निगरानी मुश्किल हो जाती है। जवान भी बॉर्डर पर नहीं रह पाते।

गांव के लोगों से केले और जूट की खेती करवाते हैं तस्कर:-


इंटेलिजेंस ऑफिसर के मुताबिक, तस्कर ही गांव वालों से जूट और केले की खेती करवाते हैं, क्योंकि इनमें आसानी से छिपा जा सकता है। बदले में वे गांव वालों को पैसा देते हैं।

BSF के एक सीनियर अफसर ने बताया कि पहले एक साथ बड़ी संख्या में गायें आती थीं। रात में तो हमारे जवान उन्हें रोक ही नहीं पाते थे, क्योंकि तस्करों की संख्या ज्यादा होती है और जवानों की कम। एक साथ डेढ़ से दो हजार गाय और उनके साथ 300 से 400 तस्कर।

तस्कर गायों को भगाते-भगाते नदी में कुदा देते थे और आसानी से तैरते हुए उस पार निकल जाते थे। उनके पास बम और पिस्टल होती है। वे भीड़ में होते थे और हमला भी कर देते थे। 2018 से गायों की तस्करी कम है, लेकिन बछड़ों की डिमांड बढ़ गई है। इन्हें केले के तने में बांधकर नदी पार कराई जा रही है, ताकि वे पानी में न बहें।

इस नेक्सस में तस्कर, पुलिस, कस्टम और BSF शामिल हैं।

भारतीय कंपनियों का नेटवर्क मिलने से फायदा

बांग्लादेश की तरफ मौजूद लोगों के पास भारतीय कंपनियों की सिम होती है। नदी क्रॉस करने के बाद भी 3 से 4 किमी तक भारत का नेटवर्क आता है। वे लोग फोन के जरिए ही एक-दूसरे को सिग्नल देते हैं।

भारत से भेजे गए गाय-बछड़े पर कुछ निशान बनाया जाता है। नदी के दूसरी तरफ खड़े लोगों को इस बारे में बता दिया जाता है। वह निशान पहचानकर उसे ले जाता है। जालंगी के घोषपाड़ा, रायपाड़ा, मुरादपुर, सरकारपाड़ा से भी तस्करी हो रही है। इन चार-पांच गांवों में करीब 3 हजार लोग रहते हैं। इनमें से करीब 200 लोग तस्करी गिरोह से मिले हुए हैं।

अनुब्रत मंडल की गिरफ्तारी के बाद तस्कर ज्यादा अलर्ट हो गए हैं। वे अब रोज की बजाय हफ्ते-15 दिन में एक बार तस्करी कर रहे हैं।

तस्करी की इकोनॉमी: हर साल डेढ़ लाख गायों की स्मगलिंग:-

BSF के अफसरों और मुखबिर के मुताबिक, गायों की कीमत साइज और तादाद के हिसाब से तय होती है। बड़ी गाय 30 हजार से 70 हजार रुपए तक में खरीदी जाती हैं। कोई मिडिलमैन किसानों से इन्हें खरीदता है। वह 15 से 20 हजार रुपए का कमीशन लेकर उन्हें तस्करों को दे देता है। बांग्लादेश में यह एक से डेढ़ लाख रुपए तक में बिकती है। ईद के समय तो कीमतें कई गुना बढ़ जाती हैं।

गाय ही नहीं, जालंगी ड्रग्स तस्करी का भी अड्‌डा:-


भारत-बांग्लादेश बॉर्डर से कैटल स्मगलिंग के अलावा ड्रग्स की तस्करी भी हो रही है। ड्रग्स तस्करी का रूट भी जालंगी से ही गुजरता है।
 

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