Sunday, November 27th, 2022

ज्ञानवापी के बाद अब जामा मस्जिद में ‘शिव मंदिर’ का दावा, क्या है पूरा मामला?

याचिकाकर्ताओं के वकील वेद प्रकाश गुप्ता ने बताया कि उन्होंने याचिका में बदायूं जामा मस्जिद के पहले यहां किला होने के सभी साक्ष्य कोर्ट के सामने रखे हैं. साथ ही परिसर के अंदर मंदिर होने के तथ्यों का भी उल्लेख किया है.

ज्ञानवापी के बाद अब जामा मस्जिद में 'शिव मंदिर' का दावा, क्या है पूरा मामला?

उत्तर प्रदेश के वाराणसी के ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में शिवलिंग होने का दावा किया गया था, जिसको लेकर मामला अभी कोर्ट में चल रहा है. वहीं अब बदायूं के जामा मस्जिद को लेकर विवाद शुरू हो गया है. इस मस्जिद में नीलकंठ महादेव मंदिर होने का दावा करते हुए सिविल कोर्ट में एक याचिका दायर कर दी गई थी| इस याचिका को सिविल कोर्ट ने सुनवाई की मंजूरी भी दे दी |

बता दें कि बदायूं के जामा मस्जिद में नीलकंठ महादेव मंदिर होने का दावा के अखिल भारतीय हिंदू महासभा (एबीएचबी) की याचिका पर सुनवाई करते हुए सिविल कोर्ट ने शुक्रवार को मामला दर्ज करने का आदेश दिया है|वहीं कोर्ट ने इस मामले में अगली सुनवाई के लिए 15 सितंबर तारीख तय की है. बता दें कि यह याचिका आठ अगस्त को दायर की गई थी|

बदायूं के जामा मस्जिद पर विवाद :-

टीओआई के हवाले से लिखी बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक हिंदू महासभा की याचिका में यह दावा किया गया है कि बदायूं का जामा मस्जिद कभी एक हिंदू राजा का किला था| इसमें यह दावा किया गया है कि इस मस्जिद की मौजूदा संरचना नीलकंठ महादेव के एक प्राचीन मंदिर को तोड़कर बनाई गई है| वहीं इस याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने इस संबंध में जामा मस्जिद के इंतेजामिया समिति, उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड, उत्तर प्रदेश पुरातत्व विभाग, केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार, बदायूं जिला मजिस्ट्रेट और राज्य के प्रमुख सचिव को भी जवाब दाख़िल करने का निर्देश दिया है|

मस्जिद के बंद कमरे का जिक्र :-

इस बाबत अखिल भारतीय हिंदू महासभा के जिलाध्यक्ष मुकेश सिंह पटेल ने दावा किया कि इस मस्जिद की जगह मंदिर ही हुआ करता था| उन्होंने एक कमरे का जिक्र करते हुए कहा कि मंदिर के अस्तित्व से जुड़े साक्ष्य उसी में हैं और यह काफी समय से बंद है| उन्होंने कहा कि हिंदू महासभा ने कोर्ट से अपील किया था कि इस मामले में केस दर्ज करके सर्वे का आदेश दें|

कोर्ट में पेश किला होने के साक्ष्य

याचिकाकर्ताओं के वकील वेद प्रकाश गुप्ता ने बताया कि उन्होंने याचिका में इस मस्जिद के पहले यहां किला होने के सभी साक्ष्य कोर्ट के सामने रखे हैं| साथ ही परिसर के अंदर मंदिर होने के तथ्यों का भी उल्लेख किया है|

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