Sunday, November 27th, 2022

यूपी सरकार ने बासमती चावल को शुद्ध बनाए रखने के लिए लिया बड़ा फैसला, 10 कीटनाशकों पर लगाया प्रतिबंध

उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से 10 कीटनाशकों पर लगाया गया प्रतिबंध पूरे प्रदेश में लागू नहीं होगा. यह प्रतिबंध प्रदेश के 30 जिलों में लागू होगा.खरीफ सीजन अपने पीक पर है. जिसमें खरीफ सीजन की मुख्य फसल धान की निराई-गुड़ाई जारी है. तो वहीं अगेती किस्म के धान की फसल पक कर तैयार हो गई है. इस बीच उत्तर प्रदेश सरकार ने एक अहम फैसला लिया है. जिसके तहत उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने 10 कीटनाशकों के प्रयोग पर प्रतिबंध लगा दिया है. प्रदेश सरकार ने बासमती चावल की शुद्धता सुनिश्चिता करते हुए यह फैसला लिया है. उत्तर प्रदेश ने यह फैसला एपीडा की सिफारिश के बाद लिया है.

असल में भारत दुनिया का प्रमुख बासमती चावल निर्यातक देश हैं. जिसके तहत भारत से प्रति वर्ष दुनिया के कई देशों में बासमती चावल का निर्यात होता है. लेकिन, बीते वर्ष यूरोपियन यूनियन ने भारत के बासमती की शुद्धता पर सवाल उठाते हुए खेप वापस लौटा दी थी. जिसे देखते हुए यूपी सरकार ने यह फैसला लिया है.

कीटनाशकों के अधिक प्रयोग की वजह से लौटाई थी बासमती चावल की खेप

भारत के बासमती की महक खाड़ी देशों के साथ ही यूरोप के कई देशों में जहां है. मसलन प्रत्येक वर्ष भारी मात्रा में बासमती चावल का निर्यात होता है. लेकिन, बीते साल यूरोपियन यूनियन के कई देशों ने भारत से आई बासमती चावल की खेप पर कीटनाशकों का अधिक प्रयाेग होने का हवाला देते लौटा दिया था. इसके बाद एपीडा ने कई राज्यों को खरीफ सीजन के दौरान कुछ चुनिंदा कीटनाशकों के प्रयोग पर प्रतिबंंध लगाने की सिफारिश की थी. जिसके बाद पंजाब और हरियाणा सरकार ने कई कीटनाशकों के प्रयोग पर प्रतिबंध लगा दिया था. इसी कड़ी में अब उत्तर प्रदेश ने कीटनाशकों पर प्रतिबंध लगाया है.

बासमती के निर्यात पर 15 फीसदी की कमी

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बासमती चावल पर लगे इस दाग की वजह से इसके बाजार पर असर पड़ा था. मसलन, कई देशों ने निर्यात में कटौती कम थी. आंकड़ों के अनुसार भारतीय बासमती चावल में अधिक कीटनाशक की मात्रा पाए जाने का मामला सामने के बाद इसके निर्यात में 15 फीसदी की कमी दर्ज की गई थी. मसलन बासमती चावल के एक्सपोर्ट में पिछले चार साल में ही करीब 6000 करोड़ रुपये की कमी आ गई है

इन कीटनाशकों पर लगाया गया है प्रतिबंध

उत्तर प्रदेश सरकार ने कुल 10 कीटनाशकों पर प्रतिबंध लगाया है. इसमें ट्राइसाइक्लोजॉल, बुप्रोफेजिन, एसीफेट, क्लोरपाइराेफॉस, मेथमिडोफॉस, प्रोपिकोनाजोल, थायोमेथाक्साम, प्रोफेनाफॉस, आइसोप्रोथियोलेन और कार्बेन्डाजिम शामिल है.

प्रदेश के 30 जिलों में लगाया है प्रतिबंध

इन सभी 30 जिलों में बासमती चावल की अधिक पैदावार होती है. जिन जिलाें में कीटनाशकों के प्रयोग पर प्रतिबंध लगाया गया है, उसमें मेरठ, अलीगढ़, औरेया, बरेली, बदांयू, पीलीभीत, रामपुर, शाहजहांपुर, एटा, कासगंंज, फर्रूखाबाद, फिरोजाबाद, इटावा, बागपत, बुलंदशहर, उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से 10 कीटनाशकों पर लगाया गया प्रतिबंध पूरे प्रदेश में लागू नहीं होगा. यह प्रतिबंध प्रदेश के 30 जिलों में लागू होगा.अमरोहा, बिजनौर, सहारानपुर, मुजफ्फरगर, गौतमबुद्धनगर, गाजियाबाद, हाथरस, आगरा, मथुरा, मैनपुरी, हापुड़, मुरादाबाद,संभल, शामली और कन्नौज शामिल हैं.

ICAR ने सुलझाई समस्या

बासमती धान में कीटनाशकों के बढ़ते प्रयोग को रोकने के लिए भले ही सरकारें कीटनाशकों पर प्रतिबंध लगा रही है. लेकिन, ICAR ने इसकी असली वजह की पहचान कर समस्या का समाधान खोज लिया है. असल में बासमती धान में अधिक रोग लगने की वजह से किसान अधिक कीटनाशकों का प्रयोग कर रहे थे. इस वजह से बासमती चावल में अधिक मात्रा में कीटनाशकों पाया जा रहा था. इससे इसका बाजार प्रभावित हो रहा था. इस मामले को सुलझाते हुए ICAR ने बासमती धान की नई राेगरोधी किस्में विकसित की है.ICAR ने ने पूसा बासमती 1509 का सुधार करके 1847 तैयार किया. जबकि 1121 का सुधार करके 1885 और 1401 को ठीक करके 1886 नाम से रोगरोधी किस्म विकसित की. इसलिए इनमें कीटनाशकों की जरूरत नहीं पड़ी. इन नई किस्मों की बुवाई इस साल बासमती के जीआई (जियोग्राफिकल इंडीकेशन) एरिया के करीब सात हजार किसानों ने की हुई है.

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